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रविवार, 5 फरवरी 2012

क्या जंग लगी तलवारों में, जो इतने दुर्दिन सहते हो





क्या जंग लगी तलवारों में, जो इतने दुर्दिन सहते होI
राणा  प्रताप के वंशज हो,क्यों कुल को कलंकित करते होII
आराध्य तुम्हारे राम-कृष्ण,जो कर्म की राह दिखाते थेI
जो दुश्मन हो आततायी, वो चक्र सुदर्शन उठाते थेI
श्री राम ने रावण को मारा, तुम गद्दारों से डरते होII
जब शस्त्रों से परहेज तुम्हे,तो राम राम क्यों जपते होI
क्या जंग लगी तलवारों में,जो इतने दुर्दिन सहते होII    
  
अंग्रेजों ने दौलत लूटी,मुगलों ने थी इज्जत  लूटी I
दौलत लूटी, इज्जत लूटी, क्या खुद्दारी भी लूट लिया,
गिद्धों ने माँ को नोंच लिया,तुम शांति शांति को जपते होI
इस भगत सुभाष की धरती पर,क्यों नामर्दों से रहते हो?
क्या जंग लगी तलवारों में जो इतने दुर्दिन सहते होII                                                                                                      

हिन्दू हो,कुछ प्रतिकार करो,तुम भारत माँ के क्रंदन काI
यह समय नहीं है, शांति पाठ और गाँधी के अभिनन्दन काII
यह समय है शस्त्र उठाने का,गद्दारों को समझाने का,
शत्रु पक्ष की धरती पर,फिर शिव तांडव दिखलाने काII
इन जेहादी जयचंदों की घर में ही कब्र बनाने का,
यह समय है हर एक हिन्दू के,राणा प्रताप बन जाने काI
इस हिन्दुस्थान की धरती पर ,फिर भगवा ध्वज फहराने काII

ये नहीं शोभता है तुमको,जो कायर सी फरियाद करोI
छोड़ो अब ये प्रेमालिंगन,कुछ पौरुष की भी बात करोII
इस हिन्दुस्थान की धरती के,उस भगत सिंह को याद करो,
वो बन्दूको को बोते थे,तुम तलवारों से डरते होI
क्या जंग लगी तलवारों में जो इतने दुर्दिन सहते होII




11 टिप्पणियाँ:

  1. वह आशुतोष जी जबाब नहीं है आपका आप ने तो एक नया जोश ही बार दिया

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  2. आशुतोष जी अपने वैभव और और गौरव को स्मरण कराने वाली इस रचना को हमारे साथ साझा करने हेतु आपका कोटिशः आभार!

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  3. इस टिप्पणी को एक ब्लॉग व्यवस्थापक द्वारा हटा दिया गया है.

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  4. आप सभी राष्ट्रवादियों का प्रोत्साहन के लिए आभार..

    ...................
    कुछ पाकिस्तानी बेनामी अपशब्द टिपण्णी लिख कर जा रहे हैं...उनसे अनुरोध है की अगर इनका बाप पाकिस्तान का और माँ कमाठीपुरा की न हो तो अपनी पहचान बताएं..
    ...............................
    हमे हिन्दू होने पर सर्वदा गर्व है

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  5. nas nas men josh bhar gaya.pak ke chupe hue mullo ko kat ke pak bhej denge.

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  6. अंग्रेजों ने दौलत लूटी,मुगलों ने थी इज्जत लूटी I
    दौलत लूटी, इज्जत लूटी, क्या खुद्दारी भी लूट लिया,
    गिद्धों ने माँ को नोंच लिया,तुम शांति शांति को जपते होI
    इस भगत सुभाष की धरती पर,क्यों नामर्दों से रहते हो?
    क्या जंग लगी तलवारों में जो इतने दुर्दिन सहते होII
    प्रिय आशुतोष जी जोश जगाते खून गरम करती हुयी रचना ...प्यारी ...अपने देश अपनी संस्कृति को जो ताक पर रखे देते हैं भ्रष्टाचारी आततायी वे कुत्ते बिल्ले से भी गए हैं ..जय श्री राधे
    सुन्दर
    भ्रमर ५

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