रविवार, 19 जून 2011

तुम्हारे लिए कुछ अनकही


मेरे अव्यक्त विचारों की,
माला कविता बन आएगी 
इन अधरों की कम्पित वीणा,
बस राग तुम्हारे गाएगी               
इस जनम की सिंदूरी रेखा,
मिट गयी प्रिये ,प्रतिवाद नहीं 
जन्मो और सदियों की कड़ियाँ ,
मैं तोड़ प्रिये फिर आऊंगा....
तब अरुणोदय की बेला में,
तुमको सिंदूर लगाऊंगा
जन्मो से कुंठित ये पीड़ा     
फिर,मोक्ष गति को पायेगी..
मेरे अव्यक्त विचारों की,
माला कविता बन आएगी ......

22 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर कविता, आपने मुझे कुछ लिखने को प्रेरित किया है.

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  2. आशुतोष जी अभिवादन बहुत सुन्दर भाव प्रेम प्रणय -ये माला जल्दी ही बन जाये
    जन्मो और सदियों की कड़ियाँ ,
    मैं तोड़ प्रिये फिर आऊंगा....
    तब अरुणोदय की बेला में,
    तुमको सिंदूर लगाऊंगा

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  3. जन्मो से कुंठित ये पीड़ा
    फिर,मोक्ष गति को पायेगी..
    मेरे अव्यक्त विचारों की,
    माला कविता बन आएगी ....
    बहुत खूबसूरती से पिरोया है भावों को ...
    सुंदर रचना ...!

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  4. वाह वाह ऐसी क्रुपा है आप पर सरस्वती की इसको निखारे देश को राह की जरूरत है

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  5. वाह,आशुतोष भाई.
    आज तो दिल चीर के लिखा है.
    दिल को छू गयी आपकी रचना .

    आपकी अठरां साल वाली टिप्पणी याद आ गयी :)

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  6. Kai baar mai sochti hu kuch bhavnayin avyakt hi reh jayein to accha hai, per apke shabdon ka itna sateek chayan aur unke man ko chune wale bhav mere us soch per bhari pad gaye!

    Aabhar: Sarthak dil ko chu lene wali nih-swarth prem ki jhalak!

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  7. बहुत ही उम्दा पोस्ट है आपका !आपना कीमती टाइम निकल कर मेरे ब्लॉग पर आए !
    डाउनलोड म्यूजिक
    डाउनलोड मूवी

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  8. /जन्मो और सदियों की कड़ियाँ ,
    मैं तोड़ प्रिये फिर आऊंगा.../
    समय को चुनौती देती और प्रेम के प्रति अडिग विचारों को प्रस्तुत करती एक सुन्दर कविता. ह्रदय से बधाई स्वीकारें.

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  9. बहुत सुन्दर मधुर गीत !

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  10. इस जनम की सिंदूरी रेखा,
    मिट गयी प्रिये ,प्रतिवाद नहीं
    जन्मो और सदियों की कड़ियाँ ,
    मैं तोड़ प्रिये फिर आऊंगा....
    तब अरुणोदय की बेला में,
    तुमको सिंदूर लगाऊंगा
    Dilko chhone waali,ek kasak paida karnewali panktiyan! Bahut sundar!

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  11. बहुत सुन्दर भावपूर्ण प्रस्तुति..शब्दों और भावों का सुन्दर संयोजन रचना को एक अद्भुत प्रवाह देता है..

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  12. बहुत सुन्दर प्रण -सुन्दर भावाभिव्यक्ति .आभार

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  13. मेरे अव्यक्त विचारों की,
    माला कविता बन आएगी ......
    bahut achcha likhe hain.

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  14. आशुतोष जी नमस्कार्। बहुत सुन्दर भाव है कविता के।

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