रविवार, 30 जून 2013

दो छोटी कवितायेँ

ब्यथित हृदय की विकल कथायें,

ब्यथित हृदय की विकल कथायें,

धूमिल नयनो की आशायें,
विकल रागिनी की विणायें,
कहा सुने हम,किसे सुनायें..
विस्मृत स्मृतियों की आवाजे,
हृदय पुष्प पर दस्तक देती,
मेरे जीवन मे आ जाए..
स्मृति के इन शेषों को,
जीवन के इन अवशेषों को..
कैसे भूले कहा भुलाये..
ब्यथित हृदय की विकल कथायें
..................................................................................
रिश्तो का  विश्वास????

कभी कभी जब दर्द का होता है एहसास,
तो पलकों को लगती है प्यास..
आंखे पलकों से अपने रिश्तो को निभाने को,
गिराती है आँसुओ की कुछ बूंदे
शायद बुझ सके पलकों की प्यास..
मगर रेत मे गिरी कुछ बूंदों की तरह..
पलके कर लेती है आँसुओ को आत्मसात..
फिर भी नहीं बुझती पलकों की प्यास.
आँखों से पलकों के रिश्तो मे आ जाता है अविश्वास..
मगर फिर भी पलके झपकती है
आँसुओ के कुछ मोती ढलकते है
क्या यही है रिश्तो का  विश्वास????
क्या यही है रिश्तो का  विश्वास????
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2 टिप्‍पणियां:

  1. प्रिय ब्लागर
    आपको जानकर अति हर्ष होगा कि एक नये ब्लाग संकलक / रीडर का शुभारंभ किया गया है और उसमें आपका ब्लाग भी शामिल किया गया है । कृपया एक बार जांच लें कि आपका ब्लाग सही श्रेणी में है अथवा नही और यदि आपके एक से ज्यादा ब्लाग हैं तो अन्य ब्लाग्स के बारे में वेबसाइट पर जाकर सूचना दे सकते हैं

    welcome to Hindi blog reader

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  2. आपका ब्लॉग मुझे बहुत अच्छा लगा, और यहाँ आकर मुझे एक अच्छे ब्लॉग को फॉलो करने का अवसर मिला. मैं भी ब्लॉग लिखता हूँ, और हमेशा अच्छा लिखने की कोशिस करता हूँ. कृपया मेरे ब्लॉग पर भी आये और मेरा मार्गदर्शन करें.

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